Free radicals in Hindi |फ्री रेडिकल्स, एंटी ऑक्सीडेंट फूड्स

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Free radicals : आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी में हम सबसे ज्यादा अपने शरीर को अनदेखा करते हैं। असमय सोना, उठना, अनियंत्रित खान पान, मानसिक तनाव आदि का असर हमें समय से पहले बूढ़ा कर देता है। मधुमेह, डायबिटीज जैसी बीमारियां तो आजकल आम हो गई हैं।

और वो भी बहुत काम उम्र के लोगों में। इनको हम lifestyle diseases बोलते हैं, मतलब वो बीमारियां जो हमें खराब जीवनशैली अपनाने की वजह से होती हैं। किंतु इन सब के अलावा एक और स्थिति है जो हमारे शरीर में पैदा होती है। और यह एक सामान्य संतुलित जीवन जीने वाले को भी परेशान कर सकती है। तो आइए जानते हैं की क्या है यह।

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क्या है फ्री रेडिकल्स | Free radicals in Hindi

हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म यानी खाना पचने से ले कर उससे ऊर्जा मिलने तथा उससे उत्पन्न अपशिष्ट का निपटारा, ये सब होने के दौरान कुछ ऐसे तत्व भी बनते हैं जिनका न तो शरीर में कोई काम होता है, और न सामान्य प्रकिया द्वारा निष्कासन। इन्ही तत्वों को फ्री रेडिकल्स कहते हैं। ( Free radicals )

विज्ञान की दृष्टि से यदि समझें तो ये तत्व अधिकतर ऑक्सीजन के अकेले अणु होते हैं। जो इधर उधर घूमते हुए शरीर के अन्य अंगों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इन अणुओंको reactive oxygen species भी कहा जाता है। इनका निपटारा अति आवश्यक होता है।

क्या क्या दुष्प्रभाव हैं फ्री रेडिकल्स के

फ्री रेडिकल्स हमारे शरीर की कोशिकाओं के क्षय के लिए जिम्मेदार होते हैं। उनकी शक्ति को कम करते हैं, समय से पहले उन्हें कमजोर कर देते हैं। आजकल हमारी जीवनशैली ऐसी हो गई है की हम अधिक से अधिक फ्री रेडिकल्स के शिकार हो रहे हैं। स्थिति गंभीर होने पर यह कैंसर जैसी भयानक बीमारी को भी जन्म दे सकते हैं। ( Free radicals )

फ्री रेडिकल्स उत्पन्न होने के कारण

फ्री रेडिकल्स प्रमुख रूप से दो कारणों से उत्पन्न होते हैं,

आंतरिक कारण: शरीर का मेटाबॉलिज्म यानी उपापचय क्रिया के दौरान सामान्यतः ये तत्व उत्पन्न होते हैं। इस स्थिति में इन्हें बनने से रोका नहीं जा सकता। ( Free radicals )

बाह्य कारण: प्रदूषण, धूम्रपान, शराब तथा जंक फ़ूड आदि के स्वांस भी फ्री रेडिकल्स बड़ी मात्रा में बनते हैं।

शरीर में प्राकृतिक तौर पर बनने वाले फ्री रेडिकल्स को तो हम रोक नहीं सकते लेकिन बाह्य कारणों पर नियंत्रण लगाना आवश्यक होता है। यह भी ध्यान देने योग्य बात है की केवल फ्री रेडिकल्स ही शरीर की एजिंग यानी उम्र बढ़ने का कारण नहीं होता। अन्य कारण भी होते हैं। इसीलिए फ्री रेडिकल्स तथा शरीर की एजिंग में कोई सीधा सीधा संबंध नहीं है।

क्या है एंटी ऑक्सीडेंट ( Free radicals)

एंटी ऑक्सीडेंट वैसे तत्व हैं जो शरीर में घूम रहे फ्री रेडिकल्स को समेट कर उनको निष्क्रिय कर देते हैं। और सामान्य प्रक्रिया द्वारा निष्कासन कर देते हैं। इनका महत्व बढ़ जाता है क्युकी ये हमारे कई अंगों को भरी नुकसान होने से बचा लेते हैं।

एंटी ऑक्सीडेंट फूड्स ( Free radicals )

डॉक्टर्स का मानना है की दवा के बदले खान पान में ही कुछ विशेष पदार्थों को शामिल कर इन फ्री रेडिकल्स को नियंत्रित किया जाना चाहिए। आइए जानते हैं कौन कौन से हैं ये एंटी ऑक्सीडेंट फूड्स। ( Free radicals )

  • मूंग: मूंग को साबुत अंकुरित करके खाना काफी फायदेमंद होता है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट होता है।
  • आंवला: आवला हर दृष्टि से शरीर के लिए उपयोगी है। हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली, रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के अलावा ये एंटी ऑक्सीडेंट भी होता है।
  • राजमा: यह प्रोटीन का एक प्रमुख स्रोत होने के साथ फ्री रेडिकल्स को भी नियंत्रण में रखता है।
  • शहद: शहद भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है तथा एंटी ऑक्सीडेंट फूड्स में गिना जाता है।
  • केला: कैल्शियम, विटामिन सी का स्रोत होने के साथ ये शरीर को फ्री रेडिकल्स से भी बचाता है।
  • अनार तथा चुकंदर: ये फल खून बढ़ाने के साथ ही एंटी ऑक्सीडेंट का भी काम करते हैं।
  • देसी गाय का घी: देसी गाय का घी हर भारतीय रसोई का महत्वपूर्ण अंग है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट होता है।
  • इन सब के अलावा बेल, अंगूर, चॉकलेट आदि में भी एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं।

इन सब खाद्य पदार्थों का सेवन करना फ्री रेडिकल्स को नियंत्रित करने में सहायक होता है। इनके अलावा कई तरह के एंटी ऑक्सीडेंट सप्लीमेंट्स यानी बाह्य स्रोत भी इस्तेमाल किए जाते हैं जिनमें इन सब वस्तुओं का अर्क होता है।

साथ ही हमें धूम्रपान, शराब जैसी बुरी लतों से स्वयं को दूर रखना चाहिए। नियमित व्यायाम आदि करते रहना चाहिए। ( Free radicals )

एक महत्वपूर्ण बात यह भी

इस मामले में एक अत्यंत ही ध्यान देने योग्य बात ये है की कैंसर के मरीजों को ठीक करने के लिए एंटी ऑक्सीडेंट सप्लीमेंट्स की सलाह नहीं दी जाती। क्युकी ये विपरित असर डालता है। कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के बजाए ये देखा गया है की ऐसे सप्लीमेंट्स इन कोशिकाओं की रक्षा करने लग जाते हैं। अतः ऐसी स्थिति में खान पान के द्वारा ही एंटी ऑक्सीडेंट तत्व प्राप्त करना उचित होता है।

प्रिय पाठकों, हर बार की तरह इस बार भी यही सलाह है की डॉक्टर से परामर्श ले कर ही कोई कदम उठाएं। हालांकि मेरा लेख विश्वसनीय जानकारियों पर ही आधारित होता है। फिर भी आप अपनी तसल्ली अवश्य करें। और अपने सुझाव देते रहें। धन्यवाद।

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