How to know baby stomach is full | शिशु का पेट भरा या नहीं |

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How to know baby stomach is full : बच्चे जब तक बोलना नहीं सीख जाते तब तक उनको होने वाली अंदरूनी परेशानियों का पता लगा पाना किसी पहेली बूझने से कम नहीं होता। उनकी खान पान तथा नींद संबंधी जरूरतों, सर्दी गर्मी के प्रति व्यवहार आदि को सही सही जान पाना मुश्किल होता है।

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How to know baby stomach is full शिशु का पेट भरा या नहीं |

How to know baby stomach

उम्र के साथ बदलता है पैटर्न ( How to know baby stomach is full )

अलग अलग उम्र के बच्चों की खाने की खुराक, नींद के घंटे, पसंद नापसंद अलग होती है। दुधमुंहे बच्चे दिन के बाईस घंटे सो के बिताते हैं, जबकि छह महीने होते होते यह अवधि अठारह रह जाती है। छह महीने के बच्चे आम तौर पर पूरी रात सोना शुरू कर देते हैं। नवजात शिशु को हर दो घंटे पर भूख महसूस होती है, जबकि छह महीने की उम्र में बच्चों को अनाज मिलने से उनका पेट थोड़ा अधिक समय तक भरा रहता है। ( How to know baby’s stomach is full )

खाने के प्रकार और मात्रा पर निर्भर करती है बच्चों की भूख ( How to know baby stomach is full)

यदि बच्चा केवल दूध पर आश्रित है तो उसे हर दो घंटे के अंतराल पर स्तनपान या बोतल से दूध पिलाने की आवश्यकता होती है। लिक्विड रूप में दिया गया खाना जल्दी पच जाता है। बच्चा छह महीने या उससे ऊपर का है तो उसके भोजन में अनाज, जैसे खिचड़ी, दाल का पानी आदि शामिल होते हैं जो पचने में थोड़ा समय लगाते हैं। ऐसे में बच्चे के भूख लगने का अंतराल लंबा होता है।

शुरुआती दिनों में होती है दिक्कत ( How to know baby stomach is full )

नई मां और बच्चे को आपसी तालमेल बिठाने में थोड़ा समय लगता है। बच्चे को कितनी मात्रा में दूध और कब कब चाहिए अथवा कौन सा खाद्य पदार्थ पसंद आ रहा है, यह पता लगाने के लिए उनका पैटर्न देखना पड़ता है। एक बार यह सुनिश्चित हो जाए फिर सामंजस्य बिठाना थोड़ा आसान है।

कुछ सामान्य संकेत ( How to know baby stomach is full )

baby stomach

जो बच्चे बोल कर बताने में असमर्थ हैं उनके हाव भाव कुछ विशेष संकेतों के द्वारा समझे जा सकते हैं। ऐसे पांच आम संकेत जो आपको ये जानने में मदद करेंगे की बच्चे का पेट भरा है या नहीं:

  1. मुट्ठी खुली या बंद होना: भूख लगने पर बच्चे रोने के साथ ही अपनी मुट्ठी कस कर एंड किए होते हैं। पेट भरा हो तो मुट्ठी खुली होती है। आहार दूध पीते हुए धीरे धीरे बच्चे की मुट्ठी की पकड़ ढीली पड़ने लगे तो यह समझना चाहिए की उसका पेट भर रहा है।
  2. शरीर ढीला छोड़ना या नींद आ जाना: स्तनपान या बोतल से दूध पीते हुए शिशु का शरीर ढीला पड़ने लगे या वो नींद में जाने लगे तो इसका अर्थ हुआ की उसका पेट भर चुका है।
  3. ध्यान भटकना, खेलने लगना: दूध पीते हुए जब बीच बीच में बच्चा खेलने लग जाए या दूध पीना बंद कर जाने बोलने लगता है तो अब वह भूखा नहीं है। ( How to know baby stomach is full )
  4. बोतल से या शरीर से दूर हट जाना: बच्चा दूध की बोतल या मां के स्तन से दूर होने की कोशिश करने लगे तो इसका मतलब है उसका अब दूध पीने का मन नहीं।
  5. दूध पीने की गति बदलना: जब शिशु का पेट भर जाता है, तो उसकी स्तनपान करने या बोतल से दूध खींचने की गति धीमी पड़ जाती है।

कुछ विशेष बातें जो ध्यान देने योग्य हैं ( How to know baby stomach is full )

कभी कभी यह भी देखा गया है की भूख लगे होने के बाद भी बच्चा सोने लगता है अथवा रोता रह जाता है किंतु दूध नहीं पीता। ऐसे में भूखे होने की वजह से वो न तो ठीक से सो पता है और न ही नींद आ जाने की वजह से ठीक से दूध पी पाता है। नतीजा, बच्चे में चिड़चिड़ापन तथा ठीक से पाचन क्रिया न हो पाना। कुछ बहुत ही छोटे सरल से उपाय हैं जो आपको इस दुविधा से निकलने में सहायता कर सकते हैं।

क्या करें जब ऐसा हो ( How to know baby stomach is full )

यदि शिशु दूध पीने के बीच में ही सोने लगे तो उसका ध्यान भटकना के लिए

  1. उसके साथ बातें करने लग जाएं।
  2. उसके हाथों और पैरों में गुदगुदी करना, उनको हिलाना डुलना करें।
  3. गीले कपड़े से बच्चे की आंखें, हथेली और तलवे पोंछें।
  4. यदि उनको कंबल या चादर जैसा कुछ ओढ़ाया है तो कुछ समय के लिए उसे हटा दें।
  5. थोड़ी देर उसे गोद में ले कर घूमना आदि करें।

छह महीने से ऊपर के बच्चों में कैसे लगाएं भूख का पता ( How to know baby stomach is full )

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छह महीने से ऊपर के बच्चों को मां के दूध के साथ साथ अन्य आहार भी मिलने शुरू हो जाते हैं। उनके डाइट में दाल, चावल की खिचड़ी, दलिया, सूजी की खीर आदि भी शामिल होती है जो सेमी लिक्विड ( ठोस अनाज का सबसे मुलायम रूप) होते हैं। इन पदार्थों में पेट भरे रखने की क्षमता अधिक होती है। इस समय में पुनः बच्चे के भूख लगने के अंतराल में परिवर्तन हो जाता है। साथ ही बच्चा अलग अलग तरह के खाद्य पदार्थों का स्वाद समझने लगता है और अपनी पसंद नापसंद भी जाहिर करने लग जाता है। इस उम्र के बच्चों में भूख लगने के कुछ सामान्य संकेत इस प्रकार हो सकते हैं:

  1. खाने की चीजें देख कर खुशी जाहिर करना।
  2. किसी और को खाते हुए देख कर खाने की तरफ पहुंचने का प्रयास करना।
  3. मां का ध्यान अपनी तरफ खींचने का प्रयास करना।

कुछ बच्चे जो खाने में बिल्कुल रुचि नहीं दिखाते उनके लिए यह पैटर्न पता लगा पाना मुश्किल होता है। ऐसे बच्चों को लगभग ढाई तीन घंटे के अंतर पर खिलाने का प्रयास करना चाहिए।

एक्सपर्ट्स देते हैं सांकेतिक भाषा को विकसित करने की सलाह ( How to know baby stomach is full )

जिस आयु तक बच्चे स्पष्ट रूप से बोलने नहीं लग जाते, उनके लिए कई पेडियाट्रिशियन सांकेतिक भाषा सीखने की सलाह देते हैं। कुछ ऐसे ही संकेत जिन्हें मां और बच्चा आपसी तालमेल से सीख सकते हैं:

  1. भूख लगने पर हाथ से मुंह की तरफ इशारा करना।
  2. पेट भरा होने पर पेट पर हाथ फेरना।
  3. किसी खास खाने की वस्तु के लिए हाथों से खास चिन्ह बनना।

धैर्य रखने की है ज़रूरत

आप एक ही दिन में बच्चे के हर क्रिया कलाप को नहीं समझ सकते। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि धैर्य से काम लें। समय के साथ मां और बच्चा दोनो सीखते हैं। गलतियां भी होना स्वाभाविक है। चिंता न कर अपने और अपने शिशु के बीच का संबंध मजबूत करने का प्रयास करें।

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