Mental Health Guide For New Mothers 2021 in Hindi

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Mental Health Guide मां बनना हर स्त्री के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कोई भी स्त्री इस समय का पूरा सदुपयोग करना चाहती है, ताकि आने वाले बच्चे को एक बेहतर जीवन मिले।लेकिन एक नई मां के सामने मातृत्व के सुख के साथ कई समस्याएं और चुनौतियां भी आती हैं ( Mental Health Guide )

गर्भधारण के साथ ही शरीर में हार्मोन्सका सक्रिय होना, पाचन संबंधी दिक्कतें, भावनात्मक उतार चढ़ाव, सब शुरू हो जाते हैं।ऐसे में ये बहुत जरूरी होता है के उनको अपने शरीर की इस दौरान होने वाली सारी बातेंअच्छे से पता हो।.

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गर्भावस्था में त्वचा, बाल, आंखों समेत स्वाद, महक संबंधी असाधारण परिवर्तन से गुजरती हैमहिलाएं

गर्भवती स्त्री की त्वचा या तो पहले से अधिक अच्छी और स्वस्थ हो जाती हैया फिर सामान्य से अधिक बुझी और थकी हुई।कुछ के चेहरे दमकते हैं जिसे हम Pregnancy GLOW भीबोलते हैं।कुछ को कील, मुंहासों से दो चार होना पड़ता है।कभी बाल बहुत गिरते हैं, कभी सुनने और देखने की क्षमता में कमी आ जाती है।हालांकि ये सारे बदलाव प्रसव के बाद ठीकहो जाते हैं, फिर भी अचानक से इन सारी चीजों का होना होने वाली मां पर प्रतिकूल असर डालता है।अपनी खूबसूरती को खो देना, वजन बढ़ जाना, पसंद नापसंद बदल जाना, इन सब को झेलना आसान नहीं होता।

मेडिकल साइंसके अनुसार गर्भावस्थामें शरीर में एस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्टेरोन नमक हार्मोन्स की सक्रियता बहुत बढ़ जाती है।इनके मुख्य उद्देश्य तो भावी मां को और बच्चे को स्वस्थ रखना और परिस्थिति के हिसाब से तैयार करना होता है।पर इन सब के साइड इफेक्ट्स भी कई होते हैं।शरीर फूलना, जोड़ों में कमजोरी और दर्द, गंध के प्रति संवेदनशीलता आदि। ( Mental Health Guide )

कुल मिला के इतनी सारी उठा पटक मच जाती हैकी महिलाएं मानसिक तौर पर बहुतअसमंजस की स्थिति में होती हैं।मां बनने की खुशी बाद में अपने साथ हो रही अजीबो गरीब चीजों से परेशान होने लगती हैं।और ये होना स्वाभाविक भी है। ( Mental Health Guide

मानसिक स्तर पर क्या होता है गर्भवती महिलाओंके साथ

नई मांओं का मानसिक स्वास्थ्य गर्भावस्थाके शुरुआती दिनों में बहुत सारी प्रक्रियाओं से गुजर रही एक महिला बहुत ही नाजुक कगार पर होती है।उसका मन मस्तिष्क प्रसन्नता, डर, घबराहट हर तरह के अनुभव कर रहा होता है।आस पास के लोग, परिवारके बड़े, परिवार की स्त्रियां सब अपनी सलाह थोपने की कोशिश में लगे होते हैं।भारतीय समाज में तो बच्चे के लिंग को लेकर भी गर्भवती महिलाओं पर बेवजह दबाव बनाने का प्रचलन है।ऐसे में शायद ही कोई उनके मानसिक स्वास्थ्य की चिंता करता है। ( Mental Health Guide )

Mental Health Guide
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Mental Health Guide इन बातों का रखना चाहिए ध्यान

ऐसे में ये आवश्यक है किहम शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्यके बारे में भी बात करें, खुल के बात करें।गर्भवती स्त्री पर खान पान को लेकर अनावश्यक दबाव न बनाएं।उसे इस अवस्था में अपने अंदर हो रहे हर परिवर्तन की सही और सटीक जानकारी दें, ये काम डॉक्टर का होना चाहिए।मानसिक शक्ति को बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों(ड्राई फ्रूट्स, दूधआदि)का सेवन करने को प्रेरित करें।योगाभ्यास, मेडिटेशन आदि की सलाह भी कई डॉक्टर देते हैं। ( Mental Health Guide )

गर्भावस्था ही नहीं उसके बाद भी रखना होता है खयाल

नई मांओं का मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान की भाषा में जिसे पोस्टपेट्रम डिप्रेशनकहा जाता है, उसका शिकार कई महिलाएं होती हैं।प्रसव के बाद अचानक से उदासी, आलस्य, निराशा का घर लेना जिसकी कोई ठोस वजह भी नहींहोती।ये सब हार्मोन्स का ही किया धरा होता है।रात को नींद न पूरी होना जिससेदिन भर थकान और चिड़चिड़ापन होता रहता है।प्रसव एक ऐसी प्रक्रिया हैं जो स्त्री के शरीर को निचोड़ कर रख देती है।शरीर से अत्यधिक खून का निकल जाना भी थकान और कमजोरी का एक बड़ा कारण होते हैं।ये सभी चीजें अवसाद का कारण बन जाती हैं।बच्चे के जन्म के पहले और बाद की परिस्थितियां दोनों ही के लिए मानसिकनरूप से तैयार रहना इतना आसान नहीं होता। ( Mental Health Guide )

ऐसे में कुछ छोटी बातों को ध्यान में रखने से इस समस्या से निजात पाना संभव है।परिवार के लोगों को मां और बच्चे के कुछ कामों की जिम्मेदारी ले लेनी चाहिए ताकि नई मां को थोड़ा आराम मिल सके।बच्चे रात को बार उठते हैं।इसीलिए मांओं को ये सलाह दी जाती है किदिन में जब बच्चा सोए,

उसी वक्त वो भी अपनी नींद पूरी करें।पौष्टिक आहार लें।अधिक तेल मसालों का सेवन करने से बचें।मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य लाभ के लिए योगाभ्यास बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।सर और पैरों सहित पूरे शरीर की मालिश भी काफी फायदेमंद साबित होती है।हालांकि समस्या अधिक बढ़ने पर डॉक्टर द्वारादवाएं भी दी जाति हैं, किंतु ऐसा तभी होता है जब पोस्टपेट्रम डिप्रेशनका बहुत अधिक नकारात्मक प्रभावपड़ रहा हो। ( Mental Health Guide )

Disadvantage of shampoo
Sad upset woman standing by mirror looking at matted fragile strand in her hand thinking about natural medicinal shampoo restoring hair structure.

कुछ और महत्वपूर्णबातें

नई मांओं का मानसिक स्वास्थ्य उदासी और निराशा से खुद को दूर रखने के लिए नई मां बच्चे के उज्जवल भविष्य के बारे में सोचें, उससे बातें करें, उसे खेलते हुए देखें।परिवार के लोग, खास तौर से बच्चे के पिता को नई मां को भावनात्मक स्तर पर साथ देना चाहिए।उसे समझना चाहिए की ये एक दौर है जो गुज़रजायेगा।अपने लोगों से संबल मिलने पर स्त्री मजबूत होगी, अपनी समस्याएं सबसे साझा करेंगी, और धीरे इस दौर से बाहर आएंगी। ( Mental Health Guide )

नई मांओं का मानसिक स्वास्थ्य कुल मिला कर गर्भावस्था, प्रसव और उसके बाद बच्चे के पालन पोषण की प्रक्रिया एक मां के लिए सुखद हो सके इसके लिएये बातें ध्यान में रखनी आवश्यक हैं – सही जानकारी, नियमित रूप से डॉक्टर्स से सलाह लेना, शरीर और मस्तिष्क को स्वस्थ रखना आदि।एक साथ इतने सारे परिवर्तनों को एक साथ इतने कम समय में स्वीकार कर लेना बहुत कठिन होता है

।अतः अनुभवी लोगों से यानीअन्य नई मांओं से संपर्क करना, अपनी बातें बताना, और उनके अनुभव से सीखनाभी बहुत काम आता है।सोशल मीडिया के इसज़माने में ये संभव हो पाया है।और उससे भी महत्वपूर्णहै भावनात्मक रूपसे मजबूत होना।अपनी मजबूत इच्छाशक्ति औरअपनों के साथ से ही एक नई मां अपने जीवन के इस अद्भुत दौर का आनंद ले सकती है और मां बनने के इस सफ़रको सहजता से तय कर सकती है। ( Mental Health Guide

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