prematurity apnea in Hindi | समय से पहले जन्मे बच्चों

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prematurity apnea : समय से पहले जन्मे शिशुओं में कई तरह की समस्याएं सामने आती है। जैसे की रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना, तंत्रिका तंत्र सही से काम न करना, शरीर का कोई अंदरूनी अंग अर्धविकसित होना, त्वचा का अत्यंत पतला होना, दूध पीने में असमर्थ होना आदि।

गर्भकाल पूरा न हो पाने की वजह से उनके अंदर कई तरह की प्रणालियां अधूरी रह जाती हैं जिन्हें मां के गर्भ के भीतर ही सुरक्षा घेरे में तैयार हो जाना चाहिए था। गर्भकाल का एक नियत समय इसीलिए तो होता है। किंतु मां की शारीरिक असमर्थता या कोई ऐसी आकस्मिक परिस्थिति अथवा बच्चे के साथ कोई ऐसी अवस्था जिसमें वो समय से पहले जन्म ले ले या उसे बाहर निकलना पड़े, तो ऐसी स्थिति को प्रीमेच्योर बर्थ बोलते हैं।

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क्या है prematurity apnea

समय से पहले जन्मे बच्चों में जब श्वास लेने का अन्तराल 15 या 20 सेकेंड से अधिक का हो अथवा सांस लेने में उनको कम मात्रा में ऑक्सीजन फेंफड़ों में जा रहा हो, तो ऐसी अवस्था को ही prematurity apnea कहा जाता है।

क्या क्या कारण हैं prematurity apnea के

सामान्य तौर पर जो बच्चे गर्भकाल का 35 हफ्तों का समय पूरा होने से पहले जन्म ले लेते हैं, उनको ही प्रीमेच्योर बेबी कहा जाता है। समय पूर्व जन्मे बच्चों में तंत्रिका तंत्र का वह भाग जो श्वसन को नियंत्रित करता है, इसका सही से विकास नहीं हुआ होता है या वो तत्काल अपने आप काम करने योग्य नहीं होता। नतीजा, अनियमित और अनियंत्रित श्वास। ऐसी परिस्थिति को ब्रेडीकार्डिया (bradycardia) बोलते हैं। डॉक्टर बच्चे के जन्म के तुंरत बाद इस स्थिति के लिए जांच करते हैं और इसका पता लगा लेते हैं। ( prematurity apnea )

कैसे चलता है पता ( prematurity apnea )

शरीर में सही मात्रा में ऑक्सीजन न पहुंच पाने की स्थिति में बच्चे के मुंह के आस पास का हिस्सा लाल अथवा ज्यादा कमी होने से नीला पड़ने लगता है। बच्चे की सांस अनियमित होती है, अंतराल लंबे छोटे होते रहते हैं तथा उसे बहुत जोर लगाना पड़ता है। अगर ये सारी चीजें बच्चे के साथ हो रहीं हो तो समाना चाहिए की उसे prematurity apnea की शिकायत है।

अन्य कारण भी होते हैं सांस उखड़ने के

ऐसा बिल्कुल जरूरी नहीं है के तंत्रिका तंत्र की अक्षमता के कारण ही बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो रही हो। कभी कभी किसी प्रकार के संक्रमण या श्वास नली में कुछ अटका होने के कारण भी ऐसा होता है। इस प्रकार की स्थिति में बच्चे का रंग नीला नहीं पड़ता। केवल मुंह के आस पास का कुछ हिस्सा लाल हो जाता है।

क्या है इसका इलाज

जैसे ही prematurity apnea को पहचान लिया जाता है, बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचने की व्यवस्था की जाती है। पहले उसके हाथ पैर तथा पीठ को रगड़ा जाता है जिससे की वो पाने आप फिर से सांस लेने लगे। यदि वो ऐसा नहीं कर पाया तो तुरत ही मास्क और पंप के सहारे ऑक्सीजन दी जाती है। ( prematurity apnea )

बच्चे के मुंह पर मास्क लगा कर उसे जुड़ी नली में पंप को कुछ अंतराल पर दबाया जाता है जिससे की उसे सांस आ सके। अस्पतालों में स्थित NICU में बच्चे को रखा जाता है जहां विभिन्न प्रकार के उपकरण इस पर नज़र रखे होते हैं। एक अलार्म सिस्टम होता है जो बच्चे के सांस लेने में अत्यधिक अंतराल होने पर इंगित करता है।

कितना समय लगता है ठीक होने में

Prematurity apnea का इलाज इसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। कभी कभी यह दिन में एक से दो बार ही होता है। कभी कभी लगातार होता है। बहुत कम प्रभावित करने वाली हो तो जन्म के या इलाज शुरू होने के 2 से 3 घंटे के अंदर ठीक हो जाती है। किंतु स्थिति यदि अधिक गंभीर हुई तो दो से तीन हफ्तों या दो से तीन महीनों का भी समय लग सकता है। डॉक्टर्स इस बात की जानकारी माता पिता को दे देते हैं।

दवाओं का भी है प्रावधान

कुछ खास दवाएं जो caffeine medicine कहलाती हैं, उन्हें मुंह के या नसों के द्वारा दी जाती हैं जो हृदय गति को नियमित करती हैं।

ठीक होने के बाद भी सावधानी बरतें

कभी कभी ये समस्या ठीक होने के बाद कुछ दिनों बाद फिर से दिखाई देने लगती है। हालांकि ऐसा काम ही होता है। किंतु कुछ मामलों में ऐसा देखा गया है। डॉक्टर्स बच्चों को अस्पताल से डिस्चार्ज करते समय एक मॉनिटरिंग सिस्टम जिसे cardiorespiratory monitor कहा जाता है, देते हैं जो बच्चे की श्वसन प्रकिया पर ध्यान रखता है। इस सिस्टम में एक बेल्ट जो बच्चे के छाती के चारो ओर बंधा होता है और उसकी हृदय गति मापता है, तथा एक अलार्म जो सांस में अधिक अंतराल होने पर सावधान करता है।

कुल मिला के यह कहना सही होगा की गर्भावस्था में स्वास्थ्य का सही से ध्यान रखना आवश्यक है, ताकि premature birth की स्थिति न आए। किंतु यदि ऐसा होता ही है, तो उसका इलाज संभव है। बस सतर्क रहने की आवश्यकता है तथा समय पर हरकत में आने की आवश्यकता है।

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